महर्षि पतंजलि का जीवन परिचय | Maharishi Patanjali Ka Jivan Parichay


योग का अलौकिक ज्ञान रखने वाले महर्षि पतंजलि ने योग को एक रूप में संजोकर मानव जाति के लिए प्रस्तुत किया मानव जाति की वर्तमान समय में योग की आवश्यकता को उन्होंने भली-भांति पूर्ण किया पतंजलि योग सूत्र इनके द्वारा रचित एक सर्वश्रेष्ठ कृति है इसमें आप योग के बारे में विस्तार से पढ़ कर समझ सकते हैं इसका अध्ययन करके आप उनके जीवन व योग दर्शन को विस्तार से समझ सकते हैं

महर्षि पतंजलि का जीवन परिचय


योग दर्शन का अर्थ महर्षि पतंजलि के जन्म के विषय में कई मत प्रचलित हैं उनके नाम के पीछे भी एक रोचक कथा विद्यमान है
इनके पिता प्रतिदिन सूर्य देव को अर्ध्य (जल) दिया करते थे। 1 दिन प्रातः काल सूर्य उदय होते समय इनके पिता ध्यान साधना के पश्चात सूर्य देव को  जल चढ़ा रहे थे जैसे ही उन्होंने अपनी अंजुली में जल लिया और अपनी आंखें बंद की तो यह दिव्य रूप से इनकी अंजुली में गिर गए इसी कारण उनका नाम भी पतंजलि रखा गया।

एक अन्य घटना के अनुसार साध्वी गोनिका  संतान प्राप्ति हेतु ध्यान साधना, पूजा पाठ  कर रही थी। और उस काल में भगवान स्वयं आदि शेष के रूप में पृथ्वी पर आना चाहते थे और अवतार के लिए किसी दिव्य आत्मा का शरीर चाहते थे।

जीवन की इस दिव्य अच्छा को पूर्ण करने के लिए साध्वी गोनिका  प्रातः काल सूर्य को जल चढ़ाया करती थी।
तभी एक दिन जब वह जल चढ़ा रही थी और उन्होंने अपनी अंजुली में जल लिया  और आँखे बंद करके सूर्य देव का ध्यान   करने लगी। जैसे ही उन्होंने अपनी अंजुली का जल सूर्य देव को चढ़ाया तभी उनके हाथों में एक   दिव्या सूक्ष्म सर्प प्रगट हो गया जिसने धीरे-धीरे नवजात बालक का रूप धारण कर लिया । 

साध्वी गोनिक ने उस बालक को पुत्र रूप में स्वीकार कर लिया और अंजलि में प्रकट होने के कारण उसका नाम पतंजलि रखा। पतंजलि के जन्म के विषय में कहीं मत प्रचलित हैं कोई उन्हें नागु जाती का मानते है कोई उन्हें शेष नाग का अवतार मानते है।

इनके द्वारा लिखित पुस्तके पाणिनि  व्याकरण महाभाष्य,  चरक संहिता और योग दर्शन इनके द्वारा रचित है और मानव जाति के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
इनके द्वारा लिखा पतंजलि योग दर्शन इनकी एक महान कृति है और योग मार्ग में जाने वालों के लिए एक अतुलनीय योगदान है।

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