पतंजलि योग सूत्र समाधी पाद से सम्बंधित सभी शोर्ट प्रश्न उत्तर

पतंजलि योग सूत्र के प्रथम पाद के सभी शोर्ट प्रश्न उत्तर आप इस पोस्ट में पढ़ सकते।

प्रश्न 1 – योग सूत्र के अनुसार चित्त की भूमिया कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर – चित्त की भूमिया पांच प्रकार की होती हैं।

2- योग सूत्र के अनुसार चित्त के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर – योग सूत्र के अनुसार चित्त के 5 प्रकार होते हैं प्रमाण, विपर्यय ,विकल्पों ,निद्रा और स्मृति।

3-चित्तवृत्ति निरोध कैसे होता है?
उत्तर – योग सूत्र में मन को ही चित कहा गया है मन की एकाग्रता से ही चित वृत्तियों का निरोध होता है।

4- चित का स्वाभाविक गुण क्या है ?
उत्तर – चित्त का स्वाभाविक गुण प्रकाश है।

5- चित्त किन गुणों से युक्त है ?
उत्तर – चित्त सत्व रजस और तमस तीनों गुणों से युक्त है परंतु अधिकतर तत्व की या प्रकाश की ज्यादा होती है।

6- योग सूत्र के अनुसार सद्गुण किसका प्रतीक है ?
उत्तर – योग सूत्र के अनुसार प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है

7- योग सूत्र के अनुसार रजोगुण किसका प्रतीक है ?
उत्तर – योग सूत्र के अनुसार रजोगुण प्रवृत्ति यानी चंचलता क्रिया का प्रतीक है।

8- योग सूत्र के अनुसार तमोगुण किसका प्रतीक है ?
उत्तर – योग सूत्र के अनुसार तमोगुण स्थिरता आलस्य का प्रतीक है।

9 – योग सूत्र में कुल कितने अध्याय हैं ?
उत्तर – योग सूत्र में चारअध्याय है समाधिपाद, साधनपाद, विभूतिपाद और कैवल्यापाद।

10-पतंजलि योग सूत्र किसने लिखा ?
उत्तर -महर्षि पतंजलि ने लिखा है।

11- योग सूत्र में कुल कितने सूत्र है ?
उत्तर – योग सूत्र में कुल 195 सूत्र है।

12- पतंजलि योग सूत्र में सूत्रों की कुल संख्या कितनी है ?
उत्तर – समाधि पाद-51 साधन पाद- 55 विभूति पाद 55 कैवल्या पाद-34

14-योग सूत्र में कितने तत्वों का वर्णन है ?
उत्तर – योग सूत्र में 26 तत्वों का वर्णन है ।

13-योग सूत्र में कितने आसनों का वर्णन है ?
उत्तर – योग सूत्र में 13 आसनों का वर्णन है ।

15- चंचलता किस गुण की विशेषता का लक्षण है ?
उत्तर – रजोगुण की ।

16-कौन सी भूमिया  योग भूमि कहलाती हैं ?
उत्तर – एकाग्र व निरुद्ध ।

17- किस भूमि में चित्त रजोगुण प्रधान होता है ? उत्तर – शिपत् भूमि

18- प्रत्येक वृत्ति के कितने कितने भाग होते हैं
उत्तर – 2 भाग होते हैं क्लिष्ट और अक्लिष्ट ।

19 – प्रमाण वृत्ती कितने प्रकार की है ?
उत्तर – 3 प्रकार की होती है प्रत्यक्ष, अनुमान और आगम।

20 अंधेरे में रस्सी को सांप समझना कौन सी वृत्ति का उदाहरण है ?
उत्तर -विपर्य वृत्ति का उदाहरण है।

21 योग सूत्र के अनुसार चित्त की वृत्तियों को रोकने का उपाय है ?
उत्तर -अभ्यास व वैराग्य ।

22 योग सूत्र के अनुसार अभ्यास में क्या-क्या विशेषता होनी चाहिए ?
उत्तर – दीर्घकाल, निरंतरता व सत्कार पूर्वक दृढ़ता से कार्य करना ।

23 वैराग्य कितने प्रकार का है ?
उत्तर – वैराग्य दो प्रकार का है अपर वैराग्य व पर
वैराग्य ।

23 ज्ञान की पराकाष्ठा कौन सा वैराग्य है ?
उत्तर – पर वैराग्य

24 ईश्वर की परिभाषा योग सूत्र में कहां पर दी गई है ?
उत्तर – पहले अध्याय के 24वें सूत्र में

25 ईश्वर की विशेषता क्या है ?
उत्तर – क्लेश कर्म विपाक आशय से मुक्त पुरुष ईश्वर कहलाता है यहीं ईश्वर की विशेषता है

26 योग सूत्र के अनुसार क्लेश कितने हैं ?
उत्तर – अविधा, अस्मिता, राग ,द्वेष, अभिनिवेश ,यह 5 कलेश होते हैं

27 संख्या में पंच क्लशो को क्रमशः क्या कहा गया है ?
उत्तर – संख्या में पंच क्लेश को तम  ,मोह, महामोह, तमिस्त्र, अंधत्मस्त्र

28 ऐसा कौन सा कलेश है जिसका डर  भगवान को भी होता है परंतु योगी को नहीं होता ?
उत्तर – अभिनिवेश ही वह क्लेश है जिसका डर योगी को नहीं होता

29 योग सूत्र के अनुसार कर्म के प्रकार हैं (प्रकृति के आधार पर) ?
उत्तर – कर्म के दो प्रकार होते है कुशल व अकुशल्

30 योग सूत्र के अनुसार प्रणव किसका नाम है ?
उत्तर – योग सूत्र के अनुसार प्रणव ईश्वर का ही नाम है ।

31 चित्त में बाधाएं उत्पन्न करने वाले अंतराया कितने हैं ?
उत्तर – चित में में बाधा उत्पन्न करने वाले अंतराया नौ हैं।

32 किसी कार्य को करना ही नहीं चाहना क्या कहलाता है ?
उत्तर – स्तयान ( चित्त की अकर्मण्यता) कहलाता है।

33 इन्ना 9 चित विक्षेप के साथ सहायक जो परिणाम स्वरूप पैदा होते हैं इन विषयों की संख्या कितनी है ?
उत्तर – 5

34 दुःख कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर – दुःख तीन प्रकार का होता है आध्यात्मिक, आदिभौतिक और आदि दैविक।

35 भावना चतुष्टय का वर्णन योग सूत्र में किस सूत्र में है ?
उत्तर – भावना चतुष्टय का वर्णन योगसूत्र के पहले अध्याय के 33 से सूत्र में है

36 भावना चतुष्टय में क्या-क्या आता है ?
उत्तर – मैत्री ,करुणा ,मुदिता, उपेक्षा, यह भावना चतुष्टय में आते हैं

37 समाधि के कितने प्रकार हैं ? उत्तर – समाधि के दो प्रकार है समप्रज्ञात व असमप्रज्ञात

38 समप्रज्ञात समाधि के कितने भेद हैं ?
उत्तर – सम्प्रज्ञात समाधि के चार भेद हैं वितर्क, विचार, आनंद व अस्मिता ।

39 असम प्रज्ञात समाधि के कितने भेद हैं ?
उत्तर – असम प्रज्ञात समाधि के दो भेद हैं भव्य प्रत्यय व उपाय प्रत्यय।

40 किस समाधि में चित्त की एकाग्रता बनी रहती है ? उत्तर – सम्प्रज्ञात समाधि में ।

41 किस समाधि में चित्त की कोई भी वृत्ति शेष नहीं रहती ?
उत्तर – असम्प्रज्ञात समाधि में कोई चित्त वृत्ति शेष नही रहती है।

42 असम प्रज्ञात समाधि प्राप्ति के लिए कौन सा वैराग्य जरूरी है ?
उत्तर – पर वैराग्य

43 योगियों के कुल कितने प्रकार बताए गए हैं ?
उत्तर – मृदु ,मध्य ,अधि मात्र इनमें तीनों के तीन तीन प्रकार हैं यानी 9 प्रकार है ।

45 सामपति के कितने प्रकार बताए गए हैं।
उत्तर – समापति के चार प्रकार बताए गए हैं सवितर्क, नीरवितर्क ,सुविचार ,निर्विचार।

44 जो जिसके पास हो वैसा ही रूप ले लेना क्या कहलाता है ?
उत्तर – समापति कहलाता है।

46 आध्यात्म प्रसाद क्या है ?
उत्तर -निर्विचार की शुद्धता से प्राप्त ज्ञान।

47 निर्विचार या आध्यात्म प्रसाद में बुद्धि कैसी हो जाती है ?
उत्तर – ऋतंभरा प्रज्ञा

48 ऋतंभरा क्या है ?
उत्तर – ज्ञान की उच्चतम अवस्था ऋतंभरा है।

49 विवेक ख्याति हो जाने के बाद उसमें भी राग रहित हो जाने पर कौन सी समाधि प्राप्त होती है ? उत्तर – धर्म मेघ समाधि ।

50 जब धर्म मेघ समाधि में भी सभी कर्म निवृत हो जाते हैं वह अवस्था क्या कहलाती है ?
उत्तर – जीवनमुक्त  अवस्था

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