षट्कर्मों का मानव शरीर पर प्रभाव

Effects of Shatkarma on Human Body Hindi – षट्कर्म एक शरीर शुद्धिकरण की क्रिया है। यह शरीर विज्ञान का ही एक रुप है। जिसके माध्यम से शरीर में  शुद्धिकरण का प्रयास किया जाता है । पौराणिक योगिक ग्रंथों में और हठयोग में भी षटकर्मों का भी वर्णन किया गया है। जिससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि में स्थिरता प्राप्त होती है। षटकर्मों के माध्यम से हमारे शरीर में उपलब्ध दो प्रमुख नाडीया ईडा और पिंगला व प्राण प्रवाह मैं स्थिति संतुलन  बनता है।

आयुर्वेद एवं हट योग मैं भी बताया गया है कि वात पित और कफ में अस्थिरता के फलस्वरुप अनेक रोग पैदा होते हैं।इन्ही रोगों से छुटकारा पाने एवं शरीर में पैदा हुए विषाक्त तत्वों को संतुलित करने एवं आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रणायाम एवं योगाभ्यास से पहले षटकर्म का प्रयोग कर लेना चाहिए।

ताकि शरीर शुद्ध हो जाए वर्तमान जीवन पद्धति में अनेक प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही है। जिसके कारण मनुष्य अनेक प्रकार की बीमारियों से घिर गया है।

जिसका मुख्य कारण उसका खान पान और रहन सहन है। जिसके फलस्वरूप मनुष्य के शरीर में वात पित कफ का असंतुलन पैदा हो रहा है। जिससे उसे अनेक बीमारिया लग रही है।

षटकर्मों का उपयोग आसन प्राणायाम तथा योग के उच्च अभ्यास में प्रवेश करने से पूर्व किया जाता है। जिससे शरीर में उपलब्ध विकार पूर्णता समाप्त हो जाए और साधना (आध्यात्मिक) मार्ग मैं आगे बढ़ने में कोई बाधा उत्पन्न हो । लेकिन षटकर्मों के माध्यम से हर प्रकार के रोग में लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

इनका मानव शरीर में बड़ा ही चमत्कारिक प्रभाव होता है। जिससे व्यक्ति पुनः स्वस्थ होकर ऊर्जान्वित हो जाता है। षटकर्म मैं छः प्रकार की क्रियाओं का वर्णन किया गया है। इसमें पहली क्रिया धौति, दूसरी वस्ती, तीसरी नेति चौथी नोली, पांचवी त्राटक और छटी क्रिया कपालभाती है।    

हटयोग में कहा गया है कि इन सभी कर्मों के अभ्यास से व्यक्ति समाधि भी प्राप्त करता है। इन के माध्यम से शरीर की शुद्धि के साथ-साथ आत्म शुद्धि भी होती है। शरीर शुद्धि से शरीर में उपलब्ध विकार दूर होने लगते हैं। जिससे स्वास्थ्य लाभ की भी प्राप्ति होती है, और मनुष्य दीर्घायु तक निरोगी रहकर जी सकता है।

उपनिषदो और वेदों में कई स्थानों पर लिखा गया है कि जीवेम शरदं शतम् अर्थात हम सौ वर्ष तक जीये। वर्तमान समय में मनुष्य की गलत जीवन शैली के कारण उसके जीवन में कहीं तरह के शारीरिक व मानसिक रोगों ने घर कर लिया है। षट्कर्मों के माध्यम से इन समस्याओं का सरलता से निदान किया जा सकता है।

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