ईशावास्योपनिषद के अनुसार विद्या और अविद्या की अवधारणा | ईशावास्योपनिषद के अनुसार ज्ञान और कर्म

ईशावास्योपनिषद के अनुसार विद्या और अविद्या की अवधारणा: अन्ध॑तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते ।ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायाताः ॥ ९ ॥ जो भी मनुष्य भोगो के वशीभूत आसक्ति रखकर उन्हें पाने के लिए अविद्या को साधन रूप मानकर भिन्न भिन्न प्रकार के कर्मो का अनुष्ठान करते रहते है। वह फलस्वरूप उन्ही कर्मो में अज्ञान

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ईशावास्योपनिषद के अनुसार कर्मनिष्ठा की अवधारणा

ईशावास्योपनिषद के अनुसार कर्मनिष्ठा की अवधारणा:-ईशावास्योपनिषद शुक्ल यजुर्वेद काण्वशाखयीय संहिता का 40 अध्याय है। मंत्र भाग का अंश होने से इसका खास महत्व है।इसको पहला उपनिषद माना जाता है। इसमें कर्म निष्ठा की अवधरणा बताते हुए कहा गया है कि ॐ ईशा वास्यमिद सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् ।तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ॥

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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जीवन परिचय | Dhirendra Krishna Shastri ka Jivan Parichay

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जीवन परिचय: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में गंडा पंच गांव, जिला छतरपुर मध्य प्रदेश (MP) में जुलाई 1996 को हुआ। इनकी माता का नाम सरोज गर्ग और पिता का नाम श्री रामकृपाल गर्ग है।घर में एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है। महाराज जी

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अमीर बनने के छोटे-छोटे कदम | ameer hone ke chote chote kadam

अमीर बनने का सपना तो हर किसी का होता है लेकिन अमीर कैसे बने। इसके लिए क्या करे। यह बात कोई कोई ही जनता है। और इस पर प्रतिक्रिया करता है और छोटे छोटे कदम इस और आगे बढ़ता है। जो उसको उसकी मंजिल तक लेकर के जाते है। आज की इस पोस्ट में आपको

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