पतंजलि योग सूत्र में वर्णित चित्त की पंच वृत्तियाँ

चित्त की वृत्तियाँ क्या है महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र के समाधि पाद के छठे सूत्र में पांच प्रकार की चित्त की वृत्तियाँ बताई है है। जिनका निरोध एक योग साधक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैसा कि उन्होंने दूसरे सूत्र में कहा है कि श्लोक – योगश्चितवृतिनिरोधः यानि चित की वृत्तियों का निरोध हो … Read more

आसनों के नाम व प्रकार

पवनमुक्तासन भाग 1 दण्डासन- पदांगुलिनमन और गुल्फनमन गुल्फचक्र- गुल्फ घूर्णन जानु नमन जानुचक्र- अर्धतितली आसन- श्रोणी चक्र- पूर्ण तितली आसन- मुष्टिका बन्धन मणिबन्ध नमन मणिबन्ध चक्र कोहनी नमन स्कन्ध चक्र ग्रीवा संचालन पवनमुक्तासन भाग 2 उतान पादासन चक्र पादासन पाद संचालनासन सुप्त पवनमुक्तासन झूलना लुढकना आसन सुप्त उदराकर्षणासन शव उदराकर्षणासन नौकासन पवनमुक्तासन भाग 3 रज्जु-कर्षणासन … Read more

श्रीमद् भगवत गीता एकादश अध्याय 11 “विश्व रुप दर्शन योग” अर्थ

विराट योग  श्रीमद भगवत गीता के 11 वें अध्याय में अर्जुन भगवान से कहते है- हे भगवन ! आपने मुझे अध्यात्म विषय का पूर्ण उपदेश  दिया इससे मेरा मोह नष्ट हो गया है। आपने कहा यह सम्पूर्ण विश्व  मेरा ही स्वरुप है। मुझसे ही उत्पन होता है। मेरी शक्ति से ही स्थिर रहता है, और … Read more

श्रीमद् भगवत गीता दशम अध्याय विभूति योग अर्थ

श्रीमद भगवत गीता के दशमाध्याय में भगवान अर्जुन से कहते है,  हे अर्जुन! इस लोक में मुझ में प्रबल निष्ठा रखता है। ऐसे मनुष्य के लिये मै अपने  गुणतम रहस्य को भी स्पष्ट कर देता हूँ । हे अर्जुन! में देवता एवं महर्षियो का आदि कारण हूँ । अतएव मेरी  उत्पति को अर्थात प्राकटय ( … Read more

श्रीमद् भगवत गीता तृतीय अध्याय “कर्मयोग अथवा समत्व योग अर्थ”

श्रीमद भगवत गीता के तृतीय अध्याय में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से पूछते है । है भगवान ! आपके कथनानुसार यदि कर्म योग की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ है । तो आप मुझे युद्ध रुपी महान भंयकर कर्मयोग में क्यो प्रवृत कर रहे है। आपके मिश्रित वचनो से मेरी बुद्धि निर्णय नही कर पा रही है । … Read more

श्रीमद् भगवत गीता द्वितीय अध्याय “सांख्य योग अथवा ज्ञान योग” अर्थ

श्रीमद भगवद गीता के अनुसार सांख्य योग अथवा ज्ञान योग का विवेचन – महाभारत युद्ध के प्रारम्भ में अर्जुन को अपने सम्बन्धियो को देखकर अत्यन्त करुणा उत्पन हुयी। अर्जुन की करुणा युक्त स्थिति को देखकर भगवान कृष्ण अर्जुन  से कहने लगे है अर्जुन ! तुम्हे असमय में यह श्रेष्ठ पुरुषो के द्धारा त्याज्य स्वर्ग की … Read more

श्रीमद् भगवत गीता प्रथम अध्याय “अर्जुन का विषाद योग” अर्थ

अर्जुन का मोह जब महाभारत का युद्ध शुरु होने वाला था तभी अर्जुन को अपने परिजनो से मोह हो जाता है और वह युद्ध करने से मना कर देता है भगवान श्रीकृष्ण तब अर्जुन को गीता का ज्ञान देते है है अर्जुन प्राणीमात्र अपने जीवन में दुःखो की निवृति तथा सुख की प्राप्ति चाहता है। … Read more

आसनों का महत्व , ज्ञान व वर्गीकरण

आसनों का महत्व , ज्ञान व वर्गीकरण :- योग में आसनो का बडा ही महत्व है जिन का हमारे शरीर पर बडा ही चमत्कारी प्रभाव पडता है। जिसका रोगो पर अदभुद प्रभाव पडता है व धीरे धीरे हमारी बिमारीया ठीक होने लगती है। हमारी रोगो से लडने की क्षमता बढ जाती है। व शरीर हल्का … Read more

योगासन करते समय किन किन बातो का ध्यान रखना चाहिए

आसनों में सावधानियां आसन करते समय कुछ खास बातो का खयाल अवश्य रखे। ताकि आपको आसनो का पूरा पूरा फायदा मिले। 1 –  आसनो को किसी योगा की पुस्तक में देखकर व पढकर करने का प्रयास न करे। 2 –   किसी अनुभवी योगाचार्य की देखरेख में ही करे । 3 – किसी भी आसन … Read more

योग का हमारी अस्थियो पर प्रभाव | Yoga Effect on Our Bones Hindi

योग करने से हमारे शरीर पर बहुत ही आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाई देते है। किसी भी बिमारी में यह हमारे शरीर की रोगो से लडने की रोग प्रतिरोधक क्षमता बडाने के साथ साथ हमें अनेक प्रकार की बिमारीयो से निजात भी दिला देते है। आज आप यहां किन किन आसानो से योग का हमारी अस्थियो पर  … Read more

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