आध्यात्मिक स्वास्थ्य कहानी | Spiritual Health Hindi Story

Spiritual Health Hindi: – एक बार श्रीमद्भागवद् कथा का प्रवचन चल रहा था व्यास जी अपने व्यासपीठ से लोगों को सकारात्मक मानसिक विचारों पर कुछ बता रहे थे और उन्होंने उस संदर्भ में एक कहानी सुनाई जो में आपको बताने जा रहा हूं। एक बार की बात है दो सहपाठी किसी गुरुकुल में साथ रहते … Read more

मोह माया का प्रभाव कहानी | The Influence of Illusion Hindi

The Influence of Illusion (maya) Hindi: एक बार एक महात्मा ने जनक जी से पूछा – माया का क्या मतलब है ?  वह ज्ञानी थे । संत महात्मा जनक जी के साथ शास्रार्थ करने आते थे । जनक जी ने कहा “योग्य समय पर प्रश्न का उत्तर दूंगा” एक दिन दोनों स्नान कर रहे थे। … Read more

मनुष्य की खोपड़ी कभी नही भरती कहानी | Man’s Skull Never fill Up Hindi Story

एक व्यक्ति भीख मांग रहा था। अचानक वहां उसे नारद जी मिल गए। नारद जी कहीं जा रहे थे। भिखारी ने चरण स्पर्श किए और कहां मैं भीख मांग मांग कर थक गया हूं। कुछ कृपा करो ! नारद जी को दया आ गई। उन्होंने कुबेर पति को पत्र लिखा। की परम पूजनीय धन के … Read more

श्रीमद् भगवत गीता एकादश अध्याय 11 “विश्व रुप दर्शन योग” अर्थ

विराट योग  श्रीमद भगवत गीता के 11 वें अध्याय में अर्जुन भगवान से कहते है- हे भगवन ! आपने मुझे अध्यात्म विषय का पूर्ण उपदेश  दिया इससे मेरा मोह नष्ट हो गया है। आपने कहा यह सम्पूर्ण विश्व  मेरा ही स्वरुप है। मुझसे ही उत्पन होता है। मेरी शक्ति से ही स्थिर रहता है, और … Read more

श्रीमद् भगवत गीता दशम अध्याय विभूति योग अर्थ

श्रीमद भगवत गीता के दशमाध्याय में भगवान अर्जुन से कहते है,  हे अर्जुन! इस लोक में मुझ में प्रबल निष्ठा रखता है। ऐसे मनुष्य के लिये मै अपने  गुणतम रहस्य को भी स्पष्ट कर देता हूँ । हे अर्जुन! में देवता एवं महर्षियो का आदि कारण हूँ । अतएव मेरी  उत्पति को अर्थात प्राकटय ( … Read more

श्रीमद् भगवत गीता तृतीय अध्याय “कर्मयोग अथवा समत्व योग अर्थ”

श्रीमद भगवत गीता के तृतीय अध्याय में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से पूछते है । है भगवान ! आपके कथनानुसार यदि कर्म योग की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ है । तो आप मुझे युद्ध रुपी महान भंयकर कर्मयोग में क्यो प्रवृत कर रहे है। आपके मिश्रित वचनो से मेरी बुद्धि निर्णय नही कर पा रही है । … Read more

श्रीमद् भगवत गीता द्वितीय अध्याय “सांख्य योग अथवा ज्ञान योग” अर्थ

श्रीमद भगवद गीता के अनुसार सांख्य योग अथवा ज्ञान योग का विवेचन – महाभारत युद्ध के प्रारम्भ में अर्जुन को अपने सम्बन्धियो को देखकर अत्यन्त करुणा उत्पन हुयी। अर्जुन की करुणा युक्त स्थिति को देखकर भगवान कृष्ण अर्जुन  से कहने लगे है अर्जुन ! तुम्हे असमय में यह श्रेष्ठ पुरुषो के द्धारा त्याज्य स्वर्ग की … Read more

श्रीमद् भगवत गीता प्रथम अध्याय “अर्जुन का विषाद योग” अर्थ | Geeta First Chapter in Hindi

अर्जुन का मोह जब महाभारत का युद्ध शुरु होने वाला था तभी अर्जुन को अपने परिजनो से मोह हो जाता है और वह युद्ध करने से मना कर देता है भगवान श्रीकृष्ण तब अर्जुन को गीता का ज्ञान देते है है अर्जुन प्राणीमात्र अपने जीवन में दुःखो की निवृति तथा सुख की प्राप्ति चाहता है। … Read more

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