नंगे शरीर धरती पर बैठने , लेटने और सोने के लाभ | Sleeping on the Earth Without Clothes Benefits in hindi

नंगे पाँव धरती पर चलना लाभदायक है इसमें कोई संदेह नही है। इसकी अपेक्षा नीचे धरती में नंगे बैठना, लेटना, सोना और कही गुना अधिक लाभकारी है। क्योकि इस स्थिति में हमारा शरीर धरती के काफी अधिक नजदीक होता है। जिससे हमारी प्राण शक्ति में अधिक वृद्धि होकर हमें ज्यादा मात्रा में लाभ होता है।

यदि आप उत्तम कोटि का स्वास्थ्य लाभ चाहते है तो आपको धरती के ऊपर बैठना , लेटना, और शयन करना ही होगा। जो लोग ऐसा करते है और लाभ अर्जित करते है । जैसे किसान और माली उन्हें कितनी शांति और सुख मिलता है। उस अनुभूति के स्तर को वही बयां कर सकते है। हमारे पूर्वज धरती की इस चमत्कारिक ऊर्जा से भलीभाँति परिचित थे। इसलिए वह प्रकृति की शरण मे रहते थे और ऐसे ऐसे कार्य करते थे जिसका वर्तमान समय में लोग विश्वास नही कर पाते है।

प्राचीन समय के योगी और मुनि जन जमीन पर बैठकर ही योग ध्यान करते थे । जिससे वह कही आश्चर्यजनक शारीरिक व आध्यात्मिक  शक्तियां प्राप्त करते थे। कही प्रसिद्ध योगी हुए जिन्होंने धरती माँ पे बैठकर अपार शक्तियां अर्जित की। यहाँ तक भगवान श्री राम, माता सीता और लखन  भी 14 वर्षो तक जमीन पर ही सोये ओर नंगे पर चले।
प्राचीन समय में विद्यार्थी गुरुकुल में जमीन पर ही है बैठकर विद्या अर्जित करते थे जमीन पर ही सोते थे वह लोग जमीन से मिलने वाली ऊर्जा का भरपूर लाभ उठाते थे।

खुले नीले आसमान के नीचे सोना बैठना गुणकारी अत्यंत गुणकारी है। जो भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे धरती पर बैठता है उसका शरीर स्फूर्ति दायक, स्वस्थ, सुंदर होता है। सर्दियों में और बरसात में जमीन पर बैठना चाहिए। कम्बलों का उपयोग ऊपर से कर सकते है। रेत, बजरी पर बैठना भी गुणकारी है।

यदि आप पृथ्वी पर बैठते हैं और सोना चाहते हैं नींद नहीं आ रही है तो आप चटाई या पतली चादर बिछाकर शुरुआत में लेट सकते हैं।

यदि आपको रात्रि में आपको नींद अच्छे से नहीं आती है। चिंता बेचैनी घबराहट अनिद्रा आपको सताते हैं तो आप धरती पर सो सकते हैं ऐसा करने से आपको बड़ी ही शांति मिलेगी। यदि आप किसी भी प्रकार के उदर विकार से ग्रसित हैं जैसे पाचन की समस्या, पेट दर्द आदि। तो आपको जमीन पर बैठना और सोना चाहिए इसमें यह अद्वितीय लाभकारी है। यदि आप ऐसा करते है तो आपके अंग अपना कार्य और अधिक ठीक से करने लग जाते । जिससे आपके शरीर मे जमा विजातीय द्रव्य बाहर आने लगते है जैसे, मल, मूत्र, पसीना। फलस्वरूप शरीर पुनः भीतर से निर्मल और साफ हो जाता है। शरीर मे एक नई जीवनशक्ति का संचार हो जाता है।

जाड़ो के समय में ज्यादा तर लोग सूर्य के प्रकाश में धूप सेकते है जिससे उन्हें सुख की अनुभूति होती है और स्वास्थ्य लाभ होता है फिर हम धरती पर बैठकर क्यो नही स्वास्थ्य लाभ ले सकते है। इसमें हमे झिझक नही करनी चाहिए। सूर्य देव की भांति ही धरती माँ भी हमारे ऊपर स्वास्थ्य की वर्षा करती है।

प्राकृतिक चिकित्सको द्वारा दिये गए आदेश पर हजारों रोगी रात्रि में नंगे बदन खुली धरती पर या जमीन पर लगी घास पर सोये ओर पुनः स्वस्थ हो गए। यदि आप अनिद्रा से पीड़ित है और जमीन पर सो सकते है। इससे इसमें बड़ा ही लाभ प्राप्त होता है। जितना लाभ आप गुदगुदे या मखमली बिस्तर में 10 घंटो में पाते है उतना लाभ आप जमीन में लेटकर कुछ ही घण्टो में पा लेते है और शरीर निरोग भी रहता है।

पहलवान और मल्ल करने वाले लोग मिट्टी को अपने बदन पर लगा कर रखते है। जिसके वह अनेक लाभ पाते है।
साँप के काटे हुए यक्ति को यदि जमीन में लगभग दो हाथ गहरा गढ़ा खोद कर उसमें बैठा देते है और गीली मिट्टी से सिर और गर्दन को बचाते हुए भर दिया जाए तो 1 से 24 घंटे के अंदर उस यक्ति के शरीर का जहर बिल्कुल बाहर निकल जायेगा और उस यक्ति की मृत्यु होने से बच जाएगी।

आमतौर पर यह देखा जा सकता है जब कभी कोई जानवर रोग से ग्रसित हो जाता है तो वह हमेशा की तरह से कुछ हटकर धरती का प्रयोग करता है। वह भोजन त्याग देता है और पृथ्वी पर बैठकर या लेटकर आराम करता है। घायल जानवर तालाब के किनारे किचड़ में भी जा लेटते है।

जंगल के जानवर ज्यादातर खोदी हुई जमीन पर ही लेटते है। यदि जानवरो को इस बात का ज्ञान है तो मनुष्य इससे अनभिज्ञ क्यो बने हुए है। या फिर जानते हुए अहंकार वस लाभ नही लेते। बहुत से पशु गुफा या बिल में रहते है जैसे लोमड़ी आदि लेकिन सोते समय वह खुली हवादार जमीन का ही प्रयोग करते है ताकि सोते समय उनके शरीर का संबंध धरती से बना रहे।

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