नंगे पैर धरती पे चलने के फायदे

पृथ्वी पर नंगे पांव चलने का लाभ प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया जा सकता है इस पृथ्वी पर चलने से जिस शांति और सुकून का अनुभव होता है वह अनुभव पक्के आंगन में या पत्थर के बने हुए आंगन में, जूता पहन कर चलने में कहां अनुभव किया जा सकता है।
नंगे पांव सुखी पृथ्वी पर या सुखी डूब पर चलने की अपेक्षा हमें गीली धरती या ओस में भीगी घास पर प्रातः काल चलना विशेष लाभप्रद एवं सुख प्रद होता है।

प्रकृति के अत्यन्त पास रहने वाले हमारे छोटे छोटे बच्चे जिन्हें नंगे पांव मिट्टी पर चलना अत्यंत मनोरंजक लगता है।
यदि हम अपनी सुक्ष्म बुद्धि ना लगाए और उनके मन की करे तो वह कभी जूते पहने ही नहीं ओर नही कपड़े पहनें और मिट्टी में लौट पोट खेल खेले, दौड़ लगाएं और मस्त रहे।

धरती में एक विलक्षण विद्युत शक्ति होती है जो नंगे पैर चलने वालों के शरीर के अंदर एक अद्भुत प्राणशक्ति का संचार करती है। बिल्कुल उसी तरह जैसे वह जैसे वह वृक्षो में प्राण ऊर्जा व शक्ति भरती है , जो उस पर स्थाई रूप से  स्थिर रहते हैं।

इस धरती पर मनुष्य को एक चलता हुआ वृक्ष ही मानना चाहिए। जिस प्रकार एक वृक्ष कवि धरती से अलग होकर पनप नहीं सकता उसी प्रकार मनुष्य भी पृथ्वी से अपने संबंध तोड़ कर कभी सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता।

जैसे वृक्ष और पौधों को धरती से पोषण मिलता है उसी प्रकार मनुष्य भी नंगे पांव पृथ्वी पर चलकर पृथ्वी से आरोग्य बल एवं दीर्घ जीवन प्राप्त करता है। नंगे पांव चलने वाले व्यक्ति को कभी नेत्र रोग होते ही नहीं है।
आजकल जो हमारे छोटे छोटे बच्चों की आंखों पर चश्मा लग रहा है उसका एक खास कारण यह है कि हमारी वर्तमान सभ्यता ने हमें नंगे पैर चलने से मना कर रखा है नंगे पैर चलने से वर्तमान सभ्यता का मान कम हो जाता है ऐसा उन्हें लगता है जिसके कारण वह अर्धनग्न बने घूम रहे है।

नंगे पैरों पृथ्वी पर चलने से पैर मजबूत, स्वस्थ, सुडौल और उनमें रक्त का संचार अच्छे से होता है। पैरों में गंदगी और दुर्गंध नही पाई जाती है। जैसे जूतों से निकालने पर पैरों में बदबू पायी जाती है। शहरों में रहने वाले लोग आराम से बाहर पार्कों में पगडंडियों में नदी के किनारों में नंगे पांव पहल कर लाभ उठा सकते हैं सर्दी के समय में पैरों में सर्दी लगने का डर केवल एक भ्रम मात्र है। जिसमें सत्यता ना के बराबर है।

हमारे यहां पर नंगे पैर साधु संत और सन्यासी लोग ही धार्मिक दृष्टि से चला करते हैं कुछ गुरु अपने शिष्यों को नंगे पैर चलने की शिक्षा दीक्षा भी देते हैं। नंगे पैर चलने पर भूख अधिक लगती है उच्च रक्तचाप और शरीर में बहुत से लोग आश्चर्यजनक रूप से दूर हो जाते हैं। नंगे पैर चलने से सिरदर्द गले की सूजन , जुकाम, पैर, और सिर का ठंडा रहना भी दूर हो जाते है।

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