कैसे हनुमान जी के डर से बादशाह ने शहर का नाम शाहजहाँबाद नाम रखा और जगह छोड़कर चले गया

किस प्रकार भगवान हनुमान जी ने गोस्वामी जी को दर्शन दिए एक सच्ची ऐतिहासिक घटना

गोस्वामी तुलसीदास जी के आशीर्वाद से एक विधवा का पति जीवित हो गया। यह खबर दिल्ली के मुसलमान बादशाह तक पहुंची।

उसने इन्हें बुला भेजा और कहा हमें भी अपनी कोई करामात दिखाओ। गोस्वामी जी ने उत्तर में निवेदन किया। जय राम के सिवा मुझे कुछ नहीं आता और नहीं करामात जानता हूं।

जो भी दिखाओ, नहीं दिखाओगे तो इस कैद से छूट नहीं पाओगे। और एक कोठरी में उनको बंद कर दिया । एक तंग मैली सी अंधेरी कोठरी में नित्य कर्म पूजा पाठ कैसे चले।

श्री तुलसीदास ने प्रातः जैसे स्नान पूजन करें श्री हनुमान जी के चरणों में मस्तक न पाया और स्तुति की उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर एकाएक की श्री हनुमान जी प्रकट हुए।

जिनका अतुलित तेज था। उनके गर्जना करते ही बंदरों की असंख्य सेना प्रकट हो गई। जिन्होंने पहले जेल के रक्षक सिपाहियों को तमाचा, दांत, गोटी से घायल कर दिया।

और जेल के अंदर जितने कैदी थे। दरवाजे खोल कर उन्हें भगा दिया। महल के खंबे कंगूरे और दरवाजे तोड़ दिए। उन में रहने वाले सभी स्त्री पुरुषों की मारपीट की।

बेगमओ के कपड़े गहने और सिर के बाल नोच डालें। सब तरफ हाहाकार मच गया। यह भयानक दृश्य देख बादशाह ने गोस्वामी के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी और हाथ जोड़कर प्रार्थना की।

आप के शिवाय और हम सब के प्राण बचाने वाला कोई नहीं। परम दयालु संत तुलसीदास ने पहले जैसा उत्पात देखा। हनुमान जी के चरणों में शांत होने के लिए विनती की। पर महावीर जी न माने और महलों में हाय हाय के सिवा कुछ ना सुनाई देता था।

गोसाई जी ने फिर श्री हनुमान जी से प्रार्थना की। इस पर श्री हनुमान जी अपनी वानरों की सेना सहित शांत होकर अंतर्ध्यान हो गए।

तब बादशाह ने श्री गोसाई जी का बड़ा आदर किया और सोने के छालों में अशरफी जवारात भर कर उनके आगे रखें। गोस्वामी जी ने उत्तर दिया कि हम इनका क्या करेंगे।

यह स्थान श्री हनुमान जी के पावन चरण पढ़ने से पवित्र हो गया। अब श्री हनुमान जी की चौकी यहां रहेगी। तुम अपने रहने का नया स्थान बनाओ।

तब बादशाह ने गोस्वामी की आज्ञा का पालन करते हुए उस स्थान को छोड़ दिया और यमुना के किनारे अपने लड़के शाहजहां के नाम पर उसने स्थान का शाहजहांबाद नाम रखा।

जहां श्री हनुमान जी प्रकट हुए थे। वहां श्री हनुमान जी की विशाल मूर्ति है इस मंदिर का महत्व अथवा मान्यता इतनी अधिक है कि दिल्ली से ही नहीं दूर-दूर से हनुमानजी के भक्त आकर श्री हनुमान जी की पूजा अर्चना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।

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