जीवन में आहार का महत्व, आवश्यकता और कार्य

आहार

आहार प्रत्येक जीव धारियों की आवश्यकता है सभी जीवित प्राणियों को जीवित एवं स्वस्थ बनाए रखने के लिए आहार की आवश्यकता होती है।

आहार के अभाव में उनके जीवन एवं अस्तित्व काही बने रहना संभव नहीं है। प्रत्येक प्राणी अपनी सुधा को शांत करने के लिए समुचित आहार का सेवन करता है।

आहार मुख से ग्रास बनकर अमाशय में पहुंचकर यह आहार भूख को शांत करता है इसके बाद ग्रहण किए गए आहार का पाचन होता है।

फिर यही आहार शरीर का पोषण करता है तथा शरीर को शक्ति प्रदान करता है इस प्रक्रिया के द्वारा यह आहार शरीर के प्रथम अनिवार्य आवश्यकता को पूरा करता है।

आहार शब्द का सामान्य अर्थ कीजो द्रव्य ग्रहण करके गले के नीचे ले जाएं उसे आहार कहते हैं आजकल आहार शब्द का प्रयोग उन्हीं द्रवों के लिए करते हैं।

जो शरीर को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है विभिन्न प्रकार के भोज्य द्रवों में निगलने की क्रिया समान होने से सभी भोज्य द्रव्यों का समावेश आहार शब्द में हो जाता है।

कोई भी पदार्थ अन्न नली के संग्रह किए जाने पर जीवनी शक्ति उत्पन्न करें धातुओं का शोषण करें उनकी रक्षा करें तथा क्षतिपूर्ति करें जीवन की प्रक्रिया समर्पित करें और शरीर के महत्व तत्वो की उत्पत्ति में सहायक हो उसे आहार कहते हैं।

आहार की आवश्यकता क्यों है

भोजन हमारे शरीर के लिए आवश्यक है अच्छे भोजन के द्वारा हमें अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसे नियमित रूप से आवश्यकता अनुसार ग्रहण करना चाहिए।

इससे दैहिक कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत होती है। इससे ही रक्त बनता है और रक्त से ही दैहिक अवयवों की वृद्धि एवं उसकी आवश्यकता होती है।

हमारा आहार भी पोषक तत्वों से युक्त होना चाहिए। इसके विभिन्न पोषक तत्वों को देह में ग्रहण करने से देह विभिन्न रोगों से दूर रहकर स्वस्थ बनकर अपनी विभिन्न क्रियाएं भली-भांति करती रहती हैं।

अतः भोजन न तो कम और ना ही आवश्यकता से अधिक करना चाहिए। इसके साथ हमें भोजन के विभिन्न तत्वों का भी ध्यान रखना चाहिए।

आहार के कार्य

आहार शरीर को अपनी विभिन्न क्रियाओं के जीवनी शक्ति तथा ऊर्जा शक्ति की प्राप्ति विभिन्न कार्बन तथा वसा द्वारा प्राप्त होती है।

शरीर के अंगों उत्तक तथा कोशिकाओं का निर्माण उनकी वृद्धि तथा क्षति पूर्ति विशेषतः प्रोटीन तथा खनिज पदार्थों द्वारा होती है।

संतुलित आहार करने से व्यक्ति का शरीर हष्ट पुष्ट तथा फुर्तीला बनता है। आहार मनुष्य की थकावट कमजोरी को दूर कर, उसे रोगों से लड़ने में शक्ति प्रदान करता है।

प्रत्येक व्यक्ति को हल्का और सुपाच्य भोजन ग्रहण करना चाहिए अपनी खाने पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।

शरीर की जीवनी क्रियाओं तथा हार्मोन की क्रियाओं का नियमन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता का संवर्धन विशेषता विटामिन खनिज तथा जल द्वारा होता है। कार्बन घटक आहार का सबसे बड़ा अंश है अधिकांश शक्ति का स्रोत है।

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