गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय


गोस्वामी तुलसीदास की आयु 112 वर्ष की रही है। भारतीय संत संप्रदाय में इनका नाम बहुत ही प्रसिद्ध रहा। राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास जन्म का जन्म यूपी स्टेट के बांदा जिले के राजपुरा नामक गांव में हुआ। इनकी माता का नाम तुलसी देवी तथा पिता का नाम आत्माराम दुबे था।

घर में एक बच्चा जब जन्म लेता है तो वह 9 महीने में पैदा होता है। लेकिन यह 12 महीने में पैदा हुए। जन्म 1511 ईस्वी में उनका जन्म हुआ और जन्म लेते ही रोए नहीं और राम बोला। इसी के कारण बचपन में इनके माता-पिता ने इसका नाम राम बोला रख दिया।

एक 2 साल के बाद इनकी माता का देहांत हो गया। 3 से 5 साल में पिता का भी देहांत हो गया था। उनके पास में ही एक आश्रम था। वहां एक संत रहते थे । नरहरी दास जी ने इनको गोद लिया और यह रामबोला को उनके आश्रम में ले जाए।

वहां पर वेद और दर्शन की शिक्षा देने लगे। इन्होंने वेद और दर्शन की शिक्षा ग्रहण की । अध्यात्म, वेद दर्शनों में इन्हें पहले से ही काफी रूचि थी। तब नरहरी दास जी ने इनका नाम तुलसीदास रख दिया। उन्होंने इनको वाराणसी में भेजा।

वहां इन्होने हिंदी साहित्य की पढ़ाई की । वहाँ उनके शेषा नामक गुरु थे। 16 वर्ष तक उन्होंने अध्ययन किया। यह वहां पर हिंदी भाषा के साहित्य को जानने गए थे। वहां पर इन्होंने बृज भाषा में वेद और दर्शन की भी शिक्षा ली। यह ज्ञान प्राप्त करने के बाद राजपुरा आए तथा कथा वाचन करने लगे।

राम का नाम लेते थे। यह बहुत ही सुंदर कथा करते थे। एक महापुरुष वहां से रोज गुजरा करते थे। एक दिन वह टीम की पूरी कथा सुनने वहीं बैठ गए। समय गुजरता गया। उन्होंने सोचा यह कितनी सुंदर कथा करते हैं।

उन्होंने अपनी कन्या के विवाह का प्रस्ताव उनके सामने रखा। तब उन्होंने सोचा कि विवाह कर ही लेना चाहिए। तब उन्होंने रत्नावली नामक कन्या से विवाह किया। वह इतनी सुंदर कन्या थी कि वह अपनी पत्नी के प्रेम रस में डूब गए थे।

उन्होंने कथा में जाना भी छोड़ दिया था। उनको पल घर के लिए भी अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे। उनको तारक नामक बेटा भी हुआ। एक बार उनकी पत्नी मायके जाती है तो उनको उसकी बहुत याद आती है, वह रात को अपनी पत्नी के घर चले गए।

तो उनकी पत्नी ने गुस्से में कहा कि शरीर हार्ड मास का पुतला है यह तो भौतिक जीवन है तो आप भगवान राम मैं अपना ध्यान लगाओ तो जीवन सफल हो जाएगा। तब वह घर गए और वहां से जाने के बाद चित्रकूट के गंगा घाट पर बैठ गए। अपनी पत्नी के मार्गदर्शन पर उन्हें लगा कि मैं पत्नी प्रेम में अंधा हो चुका हूं।

मुझे राम के ऊपर कुछ करना चाहिए। उन्होंने योगाभ्यास किया। उसके बाद उन्होंने किसी के बारे में नहीं सोचा और भक्ति की। 2 साल 7 महीने 26 दिन के नॉनस्टॉप साधना करने के बाद उन्होंने बहुत सी प्रसिद्ध पत्रिका लिखि।

इनकी विनय पत्रिका बहुत ही प्रसिद्ध (फेमस) हुई। गीता महोत्सव, हनुमान चालीसा, रामायण के 7 अध्याय, सात कांडों में रामचरितमानस, स्वाध्याय लेखन, राम जी आए इनकी अंतिम विनय पत्रिका थी 1630 में 112 वर्ष का जीवनकाल इनका रहा और उन्होंने अपने जीवन को 112 साल में अलविदा कहा।

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