एसिडिटी के मुख्य लक्षण | कारण | उपचार | योगासन | प्राणायाम | आहार

एसिडिटी क्या है

यह शरीर में आमाशय के पाचक रसों में असंतुलन के कारण उत्पन्न होती है। इसमें खट्टी डकार, उल्टी, पेट दर्द आदि की समस्या होती है। खाने का सही पाचन ना होने के कारण यह समस्या होती है। आयुर्वेद की भाषा में शरीर में पित्त के बढ़ जाने के कारण यह समस्या होती है।

दुनिया में हर तीसरा व्यक्ति को एसिडिटी (अमाशय अम्लता) की समस्या है । खट्टे पदार्थों का सेवन, अत्यधिक चाय कॉफी का सेवन, असंयमित दिनचर्या ,अनुचित आहार से यह समस्या बढ़ जाती है।

एसिडिटी (अमाशय अम्लता) के लक्षण

1.पेट गला छाति में जलन की अनुभूति।
2.भूख की कमी।
3.खाना खाने के बाद पेट बाहर निकलना।
4.खाने के बाद खट्टी व कड़वी डकार।
5.खाने के समय उल्टी आना छाती में जलन महसूस होना।
6.पेट में मरोड़ और दस्त की शिकायत।
7.जीभ में स्वाद ना आना।
8.खाना खाने के बाद शरीर में बेचैनी।
9.बार बार मुंह में छाले होना।
10.शरीर में थकावट महसूस होना।
11.अपच अर्जीन की समस्या अनियमित रूप से बने रहना।
12.ठीक से भूख प्यास ना लगना।
13.भोजन निगलने में कठिनाई।
14.भोजन में अरुचि।
15.हमेशा कब्ज की शिकायत बने रहना शरीर का पीला पड़ना। यह अमाशय अम्लता के लक्षण है

एसिडिटी के कारण

1.अधिक भोजन करने से।
2.बिना भूख के भोजन करने से।
3.अत्यधिक वसा युक्त पदार्थ जैसे छोले पूरी, पकौड़ी, टिक्की इत्यादि के सेवन से ।
4.अत्यधिक मसालेदार चीजें चीजें खाने से।
5.पानी की कमी से।
6.असंतुलित आहार ग्रहण करने से।
7.रात को भोजन देर से करने से।
8.बहुत ज्यादा उपवास करने से।
9.नशीले पदार्थों का सेवन करने से।
10.व्यायाम की कमी से जल्दबाजी में खाना खाने से।
11.भोजन चबाकर ना करने से ।
12.भोजन में अरुचि ।
13.भोजन करते समय नकारात्मक भाव।
14.एक समय में एक ही कार्य ना करने से।
15.बहुत ज्यादा नमकीन व मीठा आहार लेने से।
16.ज्यादा चाय और कॉफी पीने से।
17.खाने के तुरंत बाद काम करने से ।
18.खाने के तुरंत बाद आराम करने से।
19.मानसिक तनाव के कारण।


एसिडिटी के लिए यौगिक चिकित्सा (उपचार)

आमाशयी अम्लता के लिए योग में सबसे पहले शुद्धि क्रिया की सलाह दी जाती है । अम्लता को बाहर करने के लिए कुछ शुद्धि क्रियाएं इस प्रकार हैं जैसे – जल बस्ती जिस का आधुनिक नाम एनिमा है, लघु शंख प्रक्षालन आदि क्रियाएं रोज करें और शरीर को शुद्ध बनाएं।

एसिडिटी के लिए आसन

अम्लता को दूर करने के लिए पाचन तंत्र को सक्रियता प्रदान करने वाले आसन करने चाहिए। जैसे- पवनमुक्तासन, नौकासन, मत्स्यासन, हलासन, भुजंगासन ,योग मुद्रा, पश्चिमोत्तानासन, अर्धमत्स्येंद्रासन,

Chakrasana

चक्रासन ,

बालासन ,बैठकर, वज्रासन करें इत्यादि।

एसिडिटी के लिए प्राणायाम

आयुर्वेद की भाषा में पित्त बढ़ जाने के कारण अम्लता की समस्या होती है। पित्त दोष को शांत करने के लिए निम्न प्राणायाम करे – जैसे सूर्यभेदन ,भस्त्रिका, उज्जाई, अनुलोम विलोम, नाड़ी शुद्धि ,भ्रमरी, मूलबंध का अभ्यास भी करें।

एसिडिटी के लिए मुद्रा – एसिडिटी में आप विपरीत करनी मुद्रा कर सकते है, इससे अम्लता दूर होती है।

एसिडिटी के लिए आहार

एसिडिटी में क्या खाएं – एसिडिटी में संतुलित आहार, ताजी फल ,सब्जियां ,पुराने गेहूं का आटा, पुराने चावल , सब्जियां जैसे- घिया, तोरी, लौकी, टिंडा ,काशिफल , फल जैसे -अनार, नारियलपानी, ठंडा दूध ,शरबत,दलिया,साबूदाना ,पपीता ,खीरा ,खरबूजा ,मूली ,शलगम, हरी सब्जियां इत्यादि खाने चाहिए। यह शरीर के लिए लाभदायक है।

एसीडिटी में क्या ना खाएं – खानपान संबंधी बदलाव के कारण यह रोग होता है। कोई भी ऐसा आहार ना लें जिससे एसीडिटी के की समस्या बढ़ती हो। जैसे- देसी घी ,तेल, मक्खन ,मिर्च मसाले, खट्टे पदार्थ, खट्टे फल, जैसे – संतरा नींबू इत्यादि। कब्जिय पदार्थ, गरिष्ठ भोजन, जैसे -पिज़्ज़ा, नूडल ,बर्गर, पेटीज समोसे टिक्की इत्यादि ना खाएं। यह सभी शरीर के लिए हानिकारक होते है।

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