गुर्दे की पथरी के लक्षण | कारण | शुद्धि क्रिया | योगासन | आहार

गुर्दे की पथरी- गुर्दे की पथरी मूत्र प्रणाली में होने वाला रोग है। इसमें बालू रूप में छोटे-छोटे कण गुर्दे में बनते हैं। जो बड़े व छोटे होते हैं। कुछ छोटे कण तो मूत्र द्वारा बाहर हो जाते हैं। लेकिन बड़े शरीर में असहनीय पीड़ा उत्पन्न करते हैं।

किडनी स्टोन बहुत से कारणों से हो सकता है जैसे टमाटर, बैंगन, अमरूद, बीज वाली सब्जियां खाने से, यूरिक एसिड बढ़ने और कैल्शियम की मात्रा शरीर में बढ़ जाने व अधिक प्रोटीन युक्त चीजें लेने से भी यह होता है।

इसमें मूत्र त्याग के समय दर्द । मूत्र का गाढ़ा होना। मूत्र में खून आना। यह सारी समस्याएं इसमें होती है। यह कई तरह की होती है उच्च रक्तचाप बढ़ने के कारण भी किडनी की समस्या होती है। शुगर बढ़ जाने के कारण भी किडनी स्टोन होता है।

गुर्दे की पथरी के लक्षण –

  1. पेट में बहुत तेज दर्द।
  2. दर्द का आगे से पीछे पीठ की ओर बढ़ना।
  3. उल्टी आने जैसा महसूस होना।
  4. उल्टी आना पेशाब करते वक्त मूत्र नली में दर्द।
  5. पेशाब में खून आना।
  6. पेट दर्द के साथ बहुत अत्यधिक पसीना होना।
  7. बार-बार पेशाब की इच्छा होना।

गुर्दे की पथरी के कारण –

  1. यह अत्यधिक खट्टे पदार्थ लेने पर भी होती है।
  2. अत्यधिक चाय कॉफी के सेवन से भी होता है।
  3. मसालेदार पदार्थ खाने से भी होती है।
  4. भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यायाम की कमी।
  5. असंतुलित खानपान ।
  6. मैदा युक्त पदार्थों का अधिक उपयोग।
  7. अत्यधिक मीठे पदार्थों का सेवन करना।
  8. उच्च रक्तचाप बढ़ जाने के कारण।
  9. शुगर बढ़ जाने के कारण भी समस्या होती है।
  10. अत्यधिक प्रोटीन युक्त चीज है लेने से भी होता है।

आचरण संबंधी नियम –

इसमें आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए । संतुलित आहार करें। ताजे फल सब्जियों का सेवन करें। गर्म पानी का सेवन करें। उबली हुई दाल सब्जी ले। अत्यधिक मीठा पदार्थ ना ले। अधिक वसायुक्त पदार्थ ना ग्रहण करें। नशीले पदार्थों से बचें डॉक्टर की सलाह पर व्यायाम तथा आसन करें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिए। आवश्यकता अनुसार भोजन ग्रहण करें। रोज टहलने जाएं। भोजन के बाद तुरंत ना सोए। पानी में नींबू डालकर पिए। कुलथी की दाल खाएं व उसका पानी पिया करें।

शुद्धि क्रिया – पथरी की चिकित्सा के लिए अग्निसार क्रिया, लघु शंख प्रक्षालन प्रतिदिन करें। शंख प्रक्षालन 6 महीने में एक बार करें । नौली क्रिया करे।

गुर्दे की पथरी के लिए आसन – पथरी की चिकित्सा के लिए आसन निम्नलिखित हैं पवनमुक्तासन समूह, वज्रासन, मार्जरिआसन, त्रिकोणासन, उष्ट्रासन, शशांक आसन, ताड़ासन, कटिचक्रासन, उदाराकर्षनासना, चक्रासन, भद्रासन, नौकासन,

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन,

मेरुदंड आसन, मयूरासन, कुर्मासन इत्यादि सभी आसन कर सकते हैं।

प्राणायाम- पथरी की चिकित्सा के लिए निम्नलिखित प्राणायाम है। भस्त्रिका प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम विलोम और ध्यान करें।

आहार संबंधी नियम– ताजे फलों और सब्जियों का सेवन करें। मांसाहारी आहार न ले। सात्विक आहार ग्रहण करें। मैदा युक्त चीजों से दूर रहे हैं। जैसे समोसे, छोले भटूरे, चाऊमीन इत्यादि। अत्यधिक खट्टे पदार्थों का सेवन ना करें। मसालेदार चीजें ना खाएं। हल्की दालों का सेवन करें, भारी आहार न ले। गर्म पानी का सेवन करें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिए। केक बिस्कुट अत्यधिक मीठे शर्करा युक्त पदार्थों का सेवन न करें। बीज युक्त सब्जियां ना ले।

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