अभ्यंग क्या है और इसका इतिहास | Abhyang Kya Hai in Hindi

अभ्यंग – अभ्यंग को वायु तत्व चिकित्सा में रखा गया है। यह आयुर्वेद का भी अंग है। अभ्यंग को इंग्लिश में मसाज के नाम से भी जाना जाता है। जो अरबी भाषा के मांस शब्द से बना है जिसका अर्थ है मांसपेशियों को दबाना। उनसे कीड़ा करना जीवन की उत्पत्ति के साथ-साथ विभिन्न प्राणियों में मालिश अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है।

बच्चे के जन्म लेने के उपरांत ही मां उसे सहलाती है। कुछ थप थपाती है ताकि उसका शिशु शीघ्र विकास को प्राप्त करें, सुडौल बने, उसके अंग सबल बने, स्वस्थ और सुदृढ़ बने। आज भी भारतीय परिवारों में बच्चों को धूप में रख कर मालिश करने की परंपरा देखी जाती है।

पशु अपने बच्चों को जन्म देने के बाद चलाते हैं, पक्षी अपने अंडों को पंखों से गर्मी प्रदान करते हैं और पंखों से ही से लाकर उनकी मालिश करते हैं। मालिश के इसी महत्व के कारण हजारों वर्ष पूर्व इस की महत्वता का आयुर्वेद में गुणगान है और इसे चिकित्सा के रूप में मान्यता प्राप्त है। आयुर्वेद में कहा गया है कि शरीर की मालिश नाशक धातुओं की पुष्टि करने वाली निद्रा सुख प्रदान करने वाली मां से प्रचार रथ को निर्मल करने वाली तथा वात,कफ का शमन करने वाली होती है।

अभ्यंग का इतिहास

अभ्यंग का स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्वितीय स्थान है। स्वास्थ्य व सौंदर्य केंद्रों में इसका प्रचार व प्रसार बढ़ता ही जा रहा है सौंदर्य उपचारों में फेशियल बॉडी मसाज अरोमा थेरेपी में भी चेहरे व शरीर की एक्यूप्रेशर बिंदु के आधार पर मालिश की विशेषता है। प्राकृतिक चिकित्सा का अभ्यंग प्रमुख अंग है। स्वस्थ व रोग निवारण के लिए इससे अपने उपचार में प्राथमिकता दी गई है।

दक्षिण भारत मैं काली कड मालाबार आदि स्थानों में आयुर्वेदिक मालिश विश्व प्रसिद्ध है। विदेशों में चीन जापान व अन्य यूरोपियन देशों में प्रशिक्षित मालिश विशेषज्ञ ने इसे एक स्वतंत्र व्यवसाय के रूप में स्वास्थ्य रक्षा व रोग निवारण हेतु अपनाए हुए हैं।

एलोपैथी के जन्मदाता हिप्पोक्रेटिक ने अपने ग्रंथ में मालिश का विशेष वर्णन किया है। वह स्वयं भी मालिश प्रेमी था। उसने 110 वर्ष की लंबी आयु को प्राप्त किया प्राचीन यूनान में कुछ सुदृढ़ व सुंदर शरीर के लिए अभ्यंग का व व्यायाम का विशेष महत्व है ।

ओडीसी महाकाव्य में कवि ने अभ्यंग का उल्लेख किया है कि यूनानी योद्धा युद्ध क्षेत्र से वापस आकर अभ्यंग द्वारा भी अपनी थकान दूर करते थे। मिश्र की रानियों जो अपने सौंदर्य के लिए विख्यात थी। वह भी अपने बालों व चेहरे पर जैतून के तेल से अभ्यंग करवाती थी।

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