निम्न रक्तचाप के लक्षण | कारण | उपचार | आहार | योग | प्राणायाम | Nimn Raktchap in Hindi

निम्न रक्तचाप क्या है और इसके लक्षण क्या है और यह किस कारण से होता इसका उपचार क्या क्या और कैसे हो सकता है इसमें कौन कौन से आहार उपयुक्त है और इसमें कौन से योग आसन और प्राणायाम करने चाहिये आईये जानते है ।

निम्न रक्तचाप क्या है

इस रोग में शरीर की धमनियों द्वारा रक्त संचारित  करने की क्षमता  मैं कमी आ जाती है। सिस्टोलिक 120 मिली मीटर से नीचे उतरने पर अल्फिया घटे हुए रक्तचाप का आरंभ होता है और अगर यह उतरकर 110 पर पहुंच जाए तो उस स्थिति को निम्न रक्तचाप (लो बीपी) की स्थिति कहते हैं।

हृदय धमनियों में रक्त का प्रवाह कम हो जाने के कारण निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर ) की स्थिति उत्पन्न होती है। यह असंयमित जीवनशैली जैसे असंतुलित आहार कुपोषण नशीले पदार्थों का सेवन से हो सकते हैं। आधुनिक खान-पान जैसे मिर्च मसालेदार भोजन छिलका व रेशेदार पदार्थ की कमी। चाय कॉफी  का अत्यधिक प्रयोग से होता है । गरिष्ठ व कब्जियत पदार्थ का अत्यधिक सेवन इत्यादि भी रक्त की अम्लता में वृद्धि करके खून की कमी में सहायक होते हैं।

निम्न रक्तचाप के लक्षण

  • दैनिक कार्यों को करने हेतु शक्ति हीन  अनुभव करना।
  • छाती जकड़ी हुई महसूस करना।
  • ठंडे पसीने के साथ बेहोशी आना।
  • स्मरण शक्ति कम होना।
  • हाथ पैर ठंडे रहना ।
  • विषम परिस्थितियों में शीघ्रता से  घबरा जाना।
  • शरीर गिरा गिरा रहने की अनुभूति के साथ काम न करने की इच्छा।
  • मस्तिष्क का पोषण तत्व ऑक्सीजन की कमी के कारण चक्कर आने की समस्या।
  • शरीर को पूर्ण पोषण न मिलने के कारण भयभीत रहना आदि इस रोग के प्रमुख लक्षण  है।

निम्न रक्तचाप के कारण

  • खेलकूद में चोट लगकर खून बहने से।
  • यकृत ठीक से कार्य न करने पर।
  • पाचन क्रिया ठीक से ना होने पर।
  • मोटापे की चिंता।
  • कम खाने से।
  • मलेरिया के संक्रमण से।
  • कैंसर व्याधि से।
  • जिगर की कमजोरी से।
  • अम्लीयतायुक्त भोजन अत्यधिक रूप से करने से।
  • अत्यधिक मिर्च मसालेदार भोजन से।
  • भोजन उपरांत पानी ग्रहण कर लेना।
  • मंदाग्नि से।
  • भोजन के समय बातचीत करने से।
  • भोजन उपरांत नहाने के प्रक्रिया।
  • शारीरिक व मानसिक श्रम की प्रक्रिया में सम्मिलित ना होने से।
  • देसी फल सब्जियां अंकुरित अनाज फलाहार इत्यादि का प्रयोग न करने से।


निम्न रक्तचाप की घरेलू चिकित्सा

इस रोग मैं सकारात्मक सोच, साहस, उमंग, उत्साह के साथ सांसारिक तपोभूमि में  आशावाद होकर कर्म करें। नकारात्मक भावनाएं जैसे भय, अवसाद, निराशा, कुंठा इत्यादि को कम करने हेतु सकारात्मक भावों का पठन व मनन चिंतन करें।

  • नियमित व उचित समय पर भोजन एकांत और शांत चित्त होकर के करें मिताहारी बने।
  • भली-भांति भोजन चबाकर करें।
  • भोजन उपरांत पानी व मधुर आहार ग्रहण न करें।
  • अत्यधिक रूप से गरिष्ठ मिर्च मसालेदार मेदा युक्त भोज्य पदार्थ ग्रहण ना करें।
  • सड़क व खेलकूद संबंधित दुर्घटना से बचाव करें।
  • उचित मात्रा (कम मात्रा) में ही नमक का सेवन करें।
  • नींद की गोलियों का सेवन न करें।
  • रात्रि में सोते समय सूर्य स्वर प्रवाहित करे ।


आहार 

निम्न रक्तचाप में क्या खाएं

रस आहार- नींबू, संतरा, नारियल पानी, मीठी व नमकीन लस्सी छाछ इत्यादि।

फल – सेब, आडू, केला, संतरा, नाशपति, खरबूजा,  अनाज, गेहूं, मिश्रधन का आटा, जौ, मूंग, मसूर, काले चने, सोयाबीन, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, काजू, मुनक्का, पिस्ता, अखरोट, शलगम, पुदीना, आलू, टमाटर, काशीफल इत्यादि खाद्य पदार्थ शरीर के लिए लाभदायक  है।

निम्न रक्तचाप में शरीर के लिए अहित कर पदार्थ

मदिरापान, धूम्रपान, तंबाकू, चाय, कॉफी, नशीले पदार्थ, दर्द निवारक, गर्भ निरोधक, एंटीबायोटिक संबंधी औषधियां, संक्रमित भोजन, मांसाहारी भोजन, अंडा, मछली, इत्यादि उपवास, अत्यधिक भोजन, और जैसे भिंडी, अरबी, फूलगोभी चाट, पकौड़ी, समोसे इत्यादि शरीर के लिए अहितकर है 

निम्न रक्तचाप के लिए आसन

रक्तचाप बढ़ाने वाले आसन अर्थात पूर्व स्थिति में आने के आसन ।

  • विपरीतकरणी आसन
  • सर्वांगासन
  • हलासन
  • शरीर में रक्त संचार की वृद्धि करने वाले जैसे सूर्य नमस्कार 5 से 8 क्रम (चक्र)
  • पवनमुक्तासन
  • हलासना
  • मत्स्यासन,
  • धनुरासन
  • अर्धमत्स्येंद्रासन
  • पश्चिमोत्तानासन
  • उष्ट्रासन


निम्न रक्तचाप के लिए प्राणायाम चिकित्सा

निम्न रक्तचाप के यौगिक उपचार हेतु प्राणायाम भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। 15 से 20 मिनट की अवधि का समुचित अभ्यास व्याधि के उपचार में अत्यंत लाभकारी होता है। रक्तचाप में वृद्धि करने वाले प्राणायाम

  • सूर्यभेद
  • भस्त्रिका प्राणायाम
  • नाड़ी शोधन इत्यादि


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